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ज़बूर 84

इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 2019 · urdu

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1ऐ लश्करों के ख़ुदावन्द! तेरे घर क्या ही दिलकश हैं!

2मेरी जान ख़ुदावन्द की बारगाहों की मुश्ताक़ है,

3ऐ लश्करों के ख़ुदावन्द! ऐ मेरे बादशाहऔर मेरे ख़ुदा!

4मुबारक हैं वह जो तेरे घर में रहते हैं,

5मुबारक है वह आदमी, जिसकी ताक़त तुझ से है,

6वह वादी — ए — बुका से गुज़र कर उसे चश्मों की जगह बना लेते हैं,

7वह ताक़त पर ताक़त पाते हैं;

8ऐ ख़ुदावन्द, लश्करों के ख़ुदा,

9ऐ ख़ुदा! ऐ हमारी सिपर! देख;

10क्यूँकि तेरी बारगाहों में एक दिन हज़ार से बेहतर है।

11क्यूँकि ख़ुदावन्द ख़ुदा, आफ़ताब और ढाल है;

12ऐ लश्करों के ख़ुदावन्द!

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ज़बूर 84 — urdu:

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