1ऐ ख़ुदा, तू मेरा ख़ुदा है,
2इस तरह मैंने मक़दिस में तुझ पर निगाह की
3क्यूँकि तेरी शफ़क़त ज़िन्दगी से बेहतर है
4इसी तरह मैं उम्र भर तुझे मुबारक कहूँगा;
5मेरी जान जैसे गूदे और चर्बी से सेर होगी,
6जब मैं बिस्तर पर तुझे याद करूँगा,
7इसलिए कि तू मेरा मददगार रहा है,
8मेरी जान को तेरी ही धुन है;
9लेकिन जो मेरी जान की हलाकत के दर पै हैं,
10वह तलवार के हवाले होंगे,
11लेकिन बादशाह खु़दा में ख़ुश होगा;