1ऐ ख़ुदा, मेरी फ़रियाद सुन!
2मैं अपनी अफ़सुर्दा दिली में ज़मीन की इन्तिहा से तुझे पुकारूँगा;
3क्यूँकि तू मेरी पनाह रहा है,
4मैं हमेशा तेरे खे़मे में रहूँगा।
5क्यूँकि ऐ ख़ुदा तूने मेरी मिन्नतें क़ुबूल की हैं
6तू बादशाह की उम्र दराज़ करेगा;
7वह ख़ुदा के सामने हमेशा क़ाईम रहेगा;
8यूँ मैं हमेशा तेरी मदहसराई करूँगा,