1ऐ ख़ुदा! मुझ पर रहम फ़रमा,
2मेरे दुश्मन दिन भर मुझे निगलना चाहते हैं,
3जिस वक़्त मुझे डर लगेगा,
4मेरा फ़ख़्र ख़ुदा पर और उसके कलाम पर है।
5वह दिन भर मेरी बातों को मरोड़ते रहते हैं;
6वह इकठ्ठे होकर छिप जाते हैं;
7क्या वह बदकारी करके बच जाएँगे?
8तू मेरी आवारगी का हिसाब रखता है;
9तब तो जिस दिन मैं फ़रियाद करूँगा,
10मेरा फ़ख़्र ख़ुदा पर और उसके कलाम पर है;
11मेरा भरोसा ख़ुदा पर है, मैं डरने का नहीं।
12ऐ ख़ुदा! तेरी मन्नतें मुझ पर हैं;
13क्यूँकि तूने मेरी जान को मौत से छुड़ाया;