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ज़बूर 52

इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 2019 · urdu

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1ऐ ज़बरदस्त, तू शरारत पर क्यूँ फ़ख़्र करता है?

2तेरी ज़बान महज़ शरारत ईजाद करती है;

3तू बदी को नेकी से ज़्यादा पसंद करता है,

4ऐ दग़ाबाज़ ज़बान!

5ख़ुदा भी तुझे हमेशा के लिए हलाक कर डालेगा;

6सादिक़ भी इस बात को देख कर डर जाएँगे,

7कि देखो, यह वही आदमी है जिसने ख़ुदा को अपनी पनाहगाह न बनाया,

8लेकिन मैं तो ख़ुदा के घर में जैतून के हरे दरख़्त की तरह हूँ।

9मैं हमेशा तेरी शुक्रगुज़ारी करता रहूँगा,

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ज़बूर 52 — urdu:

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