1ऐ ख़ुदावन्द मेरे सताने वाले कितने बढ़ गए,
2बहुत से मेरी जान के बारे में कहते हैं,
3लेकिन तू ऐ ख़ुदावन्द, हर तरफ़ मेरी सिपर है।
4मैं बुलन्द आवाज़ से ख़ुदावन्द के सामने फ़रियाद करता हूँ
5मैं लेट कर सो गया;
6मैं उन दस हज़ार आदमियों से नहीं डरने का,
7उठ ऐ ख़ुदावन्द, ऐ मेरे ख़ुदा, मुझे बचा ले!
8नजात ख़ुदावन्द की तरफ़ से है।