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ज़बूर 143

इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 2019 · urdu

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1ऐ ख़ुदावन्द, मेरी दू'आ सुन,

2और अपने बन्दे को 'अदालत में न ला,

3इसलिए कि दुश्मन ने मेरी जान को सताया है;

4इसी वजह से मुझ में मेरी जान निढाल है;

5मैं पिछले ज़मानों को याद करता हूँ,

6मैं अपने हाथ तेरी तरफ़ फैलाता हूँ

7ऐ ख़ुदावन्द, जल्द मुझे जवाब दे:मेरी रूह गुदाज़ हो चली!

8सुबह को मुझे अपनी शफ़क़त की ख़बर दे,

9ऐ ख़ुदावन्द, मुझे मेरे दुश्मनों से रिहाई बख्श;

10मुझे सिखा के तेरी मर्ज़ी पर चलूँ, इसलिए कि तू मेरा ख़ुदा है!

11ऐ ख़ुदावन्द, अपने नाम की ख़ातिर मुझे ज़िन्दा कर!

12अपनी शफ़क़त से मेरे दुश्मनों को काट डाल,

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ज़बूर 143 — urdu:

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