1ऐ ख़ुदावन्द, मेरी दू'आ सुन,
2और अपने बन्दे को 'अदालत में न ला,
3इसलिए कि दुश्मन ने मेरी जान को सताया है;
4इसी वजह से मुझ में मेरी जान निढाल है;
5मैं पिछले ज़मानों को याद करता हूँ,
6मैं अपने हाथ तेरी तरफ़ फैलाता हूँ
7ऐ ख़ुदावन्द, जल्द मुझे जवाब दे:मेरी रूह गुदाज़ हो चली!
8सुबह को मुझे अपनी शफ़क़त की ख़बर दे,
9ऐ ख़ुदावन्द, मुझे मेरे दुश्मनों से रिहाई बख्श;
10मुझे सिखा के तेरी मर्ज़ी पर चलूँ, इसलिए कि तू मेरा ख़ुदा है!
11ऐ ख़ुदावन्द, अपने नाम की ख़ातिर मुझे ज़िन्दा कर!
12अपनी शफ़क़त से मेरे दुश्मनों को काट डाल,