1हम बाबुल की नदियों पर बैठे,
2वहाँ बेद के दरख़्तों पर उनके वस्त में,
3क्यूँकि वहाँ हम को ग़ुलाम करने वालों ने हम्द गाने का हुक्म दिया,
4हम परदेस में,
5ऐ येरूशलेम! अगर मैं तुझे भूलूँ,
6अगर मैं तुझे याद न रख्खूँ, अगर मैं येरूशलेम को,
7ऐ ख़ुदावन्द! येरूशलेम के दिन को,
8ऐ बाबुल की बेटी! जो हलाक होने वाली है,
9वह मुबारक होगा, जो तेरे बच्चों को लेकर,