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ज़बूर 116

इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 2019 · urdu

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1मैं ख़ुदावन्द से मुहब्बत रखता हूँ क्यूँकि उसने मेरी फ़रियाद और मिन्नत सुनी है

2चुँकि उसने मेरी तरफ़ कान लगाया,

3मौत की रस्सियों ने मुझे जकड़ लिया,

4तब मैंने ख़ुदावन्द से दुआ की,

5ख़ुदावन्द सादिक़ और करीम है;

6ख़ुदावन्द सादा लोगों की हिफ़ाज़त करता है;

7ऐ मेरी जान, फिर मुत्मइन हो;

8इसलिए के तूने मेरी जान को मौत से,

9मैं ज़िन्दों की ज़मीन में,

10मैं ईमान रखता हूँ इसलिए यह कहूँगा,

11मैंने जल्दबाज़ी से कह दिया,

12ख़ुदावन्द की सब ने'मतें जो मुझे मिलीं,

13मैं नजात का प्याला उठाकर,

14मैं ख़ुदावन्द के सामने अपनी मन्नतें,

15ख़ुदावन्द की निगाह में,

16आह! ऐ ख़ुदावन्द, मैं तेरा बन्दा हूँ।

17मैं तेरे सामने शुक्रगुज़ारी की कु़र्बानी पेश करूँगा

18मैं ख़ुदावन्द के सामने अपनी मन्नतें,

19ख़ुदावन्द के घर की बारगाहों में,

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ज़बूर 116 — urdu:

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