1मैं शफ़क़त और 'अदल का हम्द गाऊँगा;
2मैं 'अक़्लमंदी से कामिल राह पर चलूँगा,
3मैं किसी ख़बासत को मद्द — ए — नज़र नहीं रखूँगा;
4कजदिली मुझ से दूर हो जाएगी;
5जो दर पर्दा अपने पड़ोसी की बुराई करे,
6मुल्क के ईमानदारों पर मेरी निगाह होगी ताकि वह मेरे साथ रहें;
7दग़ाबाज़ मेरे घर में रहने न पाएगा;
8मैं हर सुबह मुल्क के सब शरीरों को हलाक किया करूँगा,