1मुबारक है वह आदमी जो शरीरों की सलाह पर नहीं चलता,
2बल्कि ख़ुदावन्द की शरी'अत में ही उसकी ख़ुशी है;
3वह उस दरख़्त की तरह होगा, जो पानी की नदियों के पास लगाया गया है।
4शरीर ऐसे नहीं, बल्कि वह भूसे की तरह हैं,
5इसलिए शरीर 'अदालत में क़ाईम न रहेंगे,
6क्यूँकि ख़ुदावन्द सादिक़ो की राह जानता है