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अम्सा 7

इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 2019 · urdu

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1ऐ मेरे बेटे, मेरी बातों को मान,

2मेरे फ़रमान को बजा ला और ज़िन्दा रह,

3उनको अपनी उँगलियों पर बाँध ले,

4हिकमत से कह, तू मेरी बहन है,

5ताकि वह तुझ को पराई 'औरत से बचाएँ,

6क्यूँकि मैंने अपने घर की खिड़की से,

7और मैंने एक बे'अक़्ल जवान को नादानों के बीच देखा,

8कि उस 'औरत के घर के पास गली के मोड़ से जा रहा है,

9दिन छिपे शाम के वक़्त,

10और देखो, वहाँ उससे एक 'औरत आ मिली,

11वह गौग़ाई और ख़ुदसर है,

12अभी वह गली में है, अभी बाज़ारों में,

13इसलिए उसने उसको पकड़ कर चूमा,

14“सलामती की कु़र्बानी के ज़बीहे मुझ पर फ़र्ज़ थे,

15इसीलिए मैं तेरी मुलाक़ात को निकली,

16मैंने अपने पलंग पर कामदार गालीचे,

17मैंने अपने बिस्तर को मुर और ऊद,

18आ हम सुबह तक दिल भर कर इश्क़ बाज़ी करें

19क्यूँकि मेरा शौहर घर में नहीं,

20वह अपने साथ रुपये की थैली ले गया;

21उसने मीठी मीठी बातों से उसको फुसला लिया,

22वह फ़ौरन उसके पीछे हो लिया,

23जैसे परिन्दा जाल की तरफ़ तेज़ जाता है,

24इसलिए अब ऐ बेटो, मेरी सुनो,

25तेरा दिल उसकी राहों की तरफ़ मायल न हो,

26क्यूँकि उसने बहुतों को ज़ख़्मी करके गिरा दिया है,

27उसका घर पाताल का रास्ता है,

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अम्सा 7 — urdu:

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