We Believe JesusFé, Esperança e Nova Vida

नोहा 1

इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 2019 · urdu

नोहा नोहा 2 →

1वह बस्ती जो लोगों से भरी थी, कैसी ख़ाली पड़ी है!

2वह रात को ज़ार — ज़ार रोती है, उसके आँसू चेहरे पर बहते हैं;

3यहूदाह ज़ुल्म और सख़्त मेहनत की वजह से जिलावतन हुआ,

4सिय्यून के रास्ते मातम करते हैं,

5उसके मुख़ालिफ़ ग़ालिब आए और दुश्मन खु़शहाल हुए;

6सिय्यून की बेटियों की सब शान — ओ — शौकत जाती रही;

7येरूशलेम को अपने ग़म — ओ — मुसीबत के दिनों में,

8येरूशलेम सख़्त गुनाह करके नापाक हो गया;

9उसकी नापाकी उसके दामन में है,

10दुश्मन ने उसकी तमाम 'उम्दा चीज़ों पर हाथ बढ़ाया है;

11उसके सब रहने वाले कराहते और रोटी ढूंडते हैं,

12ऐ सब आने जाने वालों, क्या तुम्हारे नज़दीक ये कुछ नहीं?

13उसने 'आलम — ए — बाला से मेरी हड्डियों में आग भेजी,

14मेरी ख़ताओं का बोझ उसी के हाथ से बाँधा गया है;

15ख़ुदावन्द ने मेरे अन्दर ही मेरे बहादुरों को नाचीज़ ठहराया;

16इसीलिए मैं रोती हूँ, मेरी आँखें आँसू से भरी हैं,

17सिय्यून ने हाथ फैलाए; उसे तसल्ली देने वाला कोई नहीं;

18ख़ुदावन्द सच्चा है, क्यूँकि मैंने उसके हुक्म से नाफ़रमानी की है;

19मैंने अपने दोस्तों को पुकारा, उन्होंने मुझे धोका दिया;

20ऐ ख़ुदावन्द देख: मैं तबाह हाल हूँ, मेरे अन्दर पेच — ओ — ताब है;

21उन्होंने मेरी आहें सुनी हैं;

22उनकी तमाम शरारत तेरे सामने आयें;

नोहा नोहा 2 →

नोहा 1 — urdu:

किताबे-मुक़द्दसKitab-i Muqaddasکتابِ مقدّس