1तब अय्यूब ने जवाब दिया,
2“जो बे ताक़त उसकी तूने कैसी मदद की;
3नादान को तूने कैसी सलाह दी,
4तू ने जो बातें कहीं?
5“मुर्दों की रूहें पानी और उसके रहने वालों के नीचे काँपती हैं।
6पाताल उसके सामने खुला है,
7वह शिमाल को फ़ज़ा में फैलाता है,
8वह अपने पानी से भरे हुए बादलों पानी को बाँध देता
9वह अपने तख़्त को ढांक लेता है
10उसने रोशनी और अंधेरे के मिलने की जगह तक,
11आसमान के सुतून काँपते,
12वह अपनी क़ुदरत से समन्दर को तूफ़ानी करता,
13उसके दम से आसमान आरास्ता होता है,
14देखो, यह तो उसकी राहों के सिर्फ़ किनारे हैं,