1तब जूफ़र नामाती ने जवाब दिया।
2इसीलिए मेरे ख़्याल मुझे जवाब सिखाते हैं,
3मैंने वह झिड़की सुन ली जो मुझे शर्मिन्दा करती है,
4क्या तू पुराने ज़माने की यह बात नहीं जानता,
5कि शरीरों की फ़तह चंद रोज़ा है,
6चाहे उसका जाह — ओ — जलाल आसमान तक बुलन्द हो जाए,
7तोभी वह अपने ही फुज़ले की तरह हमेशा के लिए बर्बाद हो जाएगा;
8वह ख़्वाब की तरह उड़ जाएगा और फिर न मिलेगा,
9जिस आँख ने उसे देखा, वह उसे फिर न देखेगी;
10उसकी औलाद ग़रीबों की ख़ुशामद करेगी,
11उसकी हड्डियाँ उसकी जवानी से पुर हैं,
12“चाहे शरारत उसको मीठी लगे,
13चाहे वह उसे बचा रख्खे और न छोड़े,
14तोभी उसका खाना उसकी अंतड़ियों में बदल गया है;
15वह दौलत को निगल गया है, लेकिन वह उसे फिर उगलेगा;
16वह अज़दहा का ज़हर चूसेगा;
17वह दरियाओं को देखने न पाएगा,
18जिस चीज़ के लिए उसने मशक़्क़त खींची, उसे वह वापस करेगा और निगलेगा नहीं;
19क्यूँकि उसने ग़रीबों पर जु़ल्म किया और उन्हें छोड़ दिया,
20इस वजह से कि वह अपने बातिन में आसूदगी से वाक़िफ़ न हुआ,
21कोई चीज़ ऐसी बाक़ी न रही जिसको उसने निगला न हो।
22अपनी अमीरी में भी वह तंगी में होगा;
23जब वह अपना पेट भरने पर होगा तो ख़ुदा अपना क़हर — ए — शदीद उस पर नाज़िल करेगा,
24वह लोहे के हथियार से भागेगा,
25वह तीर निकालेगा और वह उसके जिस्म से बाहर आएगा,
26सारी तारीकी उसके ख़ज़ानों के लिए रख्खी हुई है।
27आसमान उसके गुनाह को ज़ाहिर कर देगा,
28उसके घर की बढ़ती जाती रहेगी,
29ख़ुदा की तरफ़ से शरीर आदमी का हिस्सा,