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अय्यू 14

इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 2019 · urdu

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1इंसान जो 'औरत से पैदा होता है थोड़े दिनों का है,

2वह फूल की तरह निकलता, और काट डाला जाता है।

3इसलिए क्या तू ऐसे पर अपनी आँखें खोलता है;

4नापाक चीज़ में से पाक चीज़ कौन निकाल सकता है?

5उसके दिन तो ठहरे हुए हैं,

6इसलिए उसकी तरफ़ से नज़र हटा ले ताकि वह आराम करे,

7“क्यूँकि दरख़्त की तो उम्मीद रहती है कि अगर वह काटा जाए तो फिर फूट निकलेगा,

8अगरचे उसकी जड़ ज़मीन में पुरानी हो जाए,

9तोभी पानी की बू पाते ही वह नए अखुवे लाएगा,

10लेकिन इंसान मर कर पड़ा रहता है,

11जैसे झील का पानी ख़त्म हो जाता,

12वैसे आदमी लेट जाता है और उठता नहीं;

13काश कि तू मुझे पाताल में छिपा दे,

14अगर आदमी मर जाए तो क्या वह फिर जिएगा?

15तू मुझे पुकारता और मैं तुझे जवाब देता;

16लेकिन अब तो तू मेरे क़दम गिनता है;

17मेरी ख़ता थैली में सरब — मुहर है,

18यक़ीनन पहाड़ गिरते गिरते ख़त्म हो जाता है,

19पानी पत्थरों को घिसा डालता है,

20तू हमेशा उस पर ग़ालिब होता है, इसलिए वह गुज़र जाता है।

21उसके बेटों की 'इज़्ज़त होती है, लेकिन उसे ख़बर नहीं।

22बल्कि उसका गोश्त जो उसके ऊपर है, दुखी रहता;

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अय्यू 14 — urdu:

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