1सुलेमान की ग़ज़ल — उल — ग़ज़लात।
2वह अपने मुँह के लबों से मुझे चूमे,
3तेरे 'इत्र की खु़श्बू ख़ुशगवार है तेरा नाम 'इत्र रेख़्ता है;
4मुझे खींच ले, हम तेरे पीछे दौड़ेंगी।
5ऐ येरूशलेम की बेटियो,
6मुझे मत देखो कि मैं सियाहफ़ाम हूँ,
7ऐ मेरी जान के प्यारे! मुझे बता,
8ऐ 'औरतों में सब से ख़ूबसूरत,
9ऐ मेरी प्यारी, मैंने तुझे फ़िर'औन के रथ की घोड़ियों में से एक के साथ मिसाल दी है।
10तेरे गाल लगातार जु़ल्फ़ों में खु़शनुमाँ हैं,
11हम तेरे लिए सोने के तौक़ बनाएँगे, और उनमें चाँदी के फूल जड़ेंगे।
12जब तक बादशाह तनावुल फ़रमाता रहा,
13मेरा महबूब मेरे लिए दस्ता — ए — मुर है,
14मेरा महबूब मेरे लिए ऐनजदी के अंगूरिस्तान से मेहन्दी के फूलों का गुच्छा है।
15देख, तू खू़बसूरत है ऐ मेरी प्यारी,
16देख, तू ही खू़बसूरत है ऐ मेरे महबूब, बल्कि दिल पसन्द है;
17हमारे घर के शहतीर देवदार के और हमारी कड़ियाँ सनोबर की हैं।