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स्तोत्र 42

Biblica® हिंदी समकालीन संस्करण-स्वतंत्र उपलब्धि · hindi

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1जैसे हिरणी को बहते झरनों की उत्कट लालसा होती है,

2मेरा प्राण परमेश्वर के लिए, हां, जीवन्त परमेश्वर के लिए प्यासा है.

3दिन और रात,

4जब मैं अपने प्राण आपके सम्मुख उंडेल रहा हूं,

5मेरे प्राण, तुम ऐसे खिन्‍न क्यों हो?

6मेरे परमेश्वर! मेरे अंदर खिन्‍न है मेरा प्राण;

7आपके झरने की गर्जना के ऊपर से

8दिन के समय याहवेह अपना करुणा-प्रेम प्रगट करते हैं,

9परमेश्वर, मेरी चट्टान42:9 अर्थात् आश्रय से मैं प्रश्न करूंगा,

10जब सारे दिन मेरे दुश्मन

11मेरे प्राण, तुम ऐसे खिन्‍न क्यों हो?

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स्तोत्र 42 — hindi:

इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी - 2019