1मैं धैर्यपूर्वक याहवेह की प्रतीक्षा करता रहा;
2उन्होंने मुझे सत्यानाश के गड्ढे में से बचा लिया,
3उन्होंने मुझे हमारे परमेश्वर के स्तवन में,
4धन्य है वह पुरुष,
5याहवेह, मेरे परमेश्वर,
6आपको बलि और भेंट की कोई अभिलाषा नहीं,
7तब मैंने यह कहा, “देखिए मैं आ रहा हूं;
8मेरे परमेश्वर, मुझे प्रिय है आपकी ही इच्छापूर्ति;
9विशाल सभा में मैंने आपके धर्ममय शुभ संदेश का प्रचार किया है;
10मैंने अपने परमेश्वर की धार्मिकता को अपने हृदय में ही सीमित नहीं रखा;
11याहवेह, आप अपनी कृपा से मुझे दूर न करिये;
12मैं असंख्य बुराइयों से घिर चुका हूं; मेरे अपराधों ने बढ़कर मुझे दबा दिया है;
13याहवेह, कृपा कर मुझे उद्धार प्रदान कीजिए;
14वे, जो मेरे प्राणों के प्यासे हैं,
15वे सभी, जो मेरी स्थिति को देख, “आहा! आहा!”
16किंतु वे सभी, जो आपकी खोज करते हैं
17प्रभु, मैं गरीब और ज़रूरतमंद हूं;