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स्तोत्र 36

Biblica® हिंदी समकालीन संस्करण-स्वतंत्र उपलब्धि · hindi

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1दुष्ट के हृदय में

2अपनी ही नज़रों में वह खुद की चापलूसी करता है.

3उसका बोलना छलपूर्ण एवं बुराई का है;

4यहां तक कि बिछौने पर लेटे हुए वह बुरी युक्ति रचता रहता है;

5याहवेह, आपका करुणा-प्रेम स्वर्ग तक,

6आपकी धार्मिकता विशाल पर्वत समान,

7कैसा अप्रतिम है आपका करुणा-प्रेम!

8वे आपके आवास के उत्कृष्ट भोजन से तृप्‍त होते हैं;

9आप ही जीवन के स्रोत हैं;

10जिनमें आपके प्रति श्रद्धा है, उन पर आप अपना करुणा-प्रेम

11मुझे अहंकारी का पैर कुचल न पाए,

12कुकर्मियों का अंत हो चुका है, वे ज़मीन-दोस्त हो चुके हैं,

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स्तोत्र 36 — hindi:

इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी - 2019