1हर एक स्थिति में मैं याहवेह को योग्य कहता रहूंगा;
2मेरी आत्मा याहवेह में गर्व करती है;
3मेरे साथ याहवेह का गुणगान करो;
4मैंने याहवेह से प्रार्थना की और उन्होंने प्रत्युत्तर दिया;
5जिन्होंने उनसे अपेक्षा की, वे उल्लसित ही हुए;
6इस दुःखी पुरुष ने सहायता के लिए पुकारा और याहवेह ने प्रत्युत्तर दिया;
7याहवेह का दूत उनके श्रद्धालुओं के चारों ओर उनकी चौकसी करता रहता है
8स्वयं चखकर देख लो कि कितने भले हैं याहवेह;
9सभी भक्तो, याहवेह के प्रति श्रद्धा रखो.
10युवा सिंह दुर्बल हो सकते हैं और वे भूखे भी रह जाते हैं,
11मेरे बालको, निकट आकर ध्यान से सुनो;
12तुममें से जिस किसी को जीवन के मूल्य का बोध है
13वह अपनी जीभ को बुरा बोलने से
14बुराई में रुचि लेना छोड़कर परोपकार करे;
15क्योंकि याहवेह की दृष्टि धर्मियों पर
16परंतु याहवेह बुराई करनेवालों से दूर रहते हैं;
17धर्मी की पुकार को याहवेह अवश्य सुनते हैं;
18याहवेह टूटे हृदय के निकट होते हैं,
19यह संभव है कि धर्मी पर अनेक-अनेक विपत्तियां आ पड़ें,
20वह उसकी हर एक हड्डी को सुरक्षित रखते हैं,
21दुष्टता ही दुष्ट की मृत्यु का कारण होती है;
22याहवेह अपने सेवकों को छुड़ा लेते हैं;