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सूक्ति संग्रह 9

Biblica® हिंदी समकालीन संस्करण-स्वतंत्र उपलब्धि · hindi

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1ज्ञान ने एक घर का निर्माण किया है;

2उसने उत्कृष्ट भोजन तैयार किए हैं तथा उत्तम द्राक्षारस भी परोसा है;

3आमंत्रण के लिए उसने अपनी सहेलियां भेज दी हैं

4“जो कोई सरल-साधारण है, यहां आ जाए!”

5“आ जाओ, मेरे भोज में सम्मिलित हो जाओ.

6अपना भोला चालचलन छोड़कर;

7यदि कोई ठट्ठा करनेवाले की भूल सुधारता है, उसे अपशब्द ही सुनने पड़ते हैं;

8तब ठट्ठा करनेवाले को मत डांटो, अन्यथा तुम उसकी घृणा के पात्र हो जाओगे;

9शिक्षा ज्ञानवान को दो. इससे वह और भी अधिक ज्ञानवान हो जाएगा;

10याहवेह के प्रति श्रद्धा-भय से ज्ञान का

11तुम मेरे द्वारा ही आयुष्मान होगे

12यदि तुम बुद्धिमान हो, तो तुम्हारा ज्ञान तुमको प्रतिफल देगा;

13श्रीमती मूर्खता उच्च स्वर में बक-बक करती है;

14उसके घर के द्वार पर ही अपना आसन लगाया है,

15वह उनको आह्वान करती है, जो वहां से निकलते हैं,

16“जो कोई सीधा-सादा है, वह यहां आ जाए!”

17“मीठा लगता है चोरी किया हुआ जल;

18भला उसे क्या मालूम कि वह मृतकों का स्थान है,

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सूक्ति संग्रह 9 — hindi:

इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी - 2019