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सूक्ति संग्रह 2

Biblica® हिंदी समकालीन संस्करण-स्वतंत्र उपलब्धि · hindi

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1मेरे पुत्र, यदि तुम मेरे वचन स्वीकार करो

2यदि अपने कानों को ज्ञान के प्रति चैतन्य

3वस्तुतः यदि तुम समझ को आह्वान करो

4यदि तुम इसकी खोज उसी रीति से करो

5तब तुम्हें ज्ञात हो जाएगा कि याहवेह के प्रति श्रद्धा क्या होती है,

6क्योंकि ज्ञान को देनेवाला याहवेह ही हैं;

7खरे के लिए वह यथार्थ ज्ञान आरक्षित रखते हैं,

8वह बिना पक्षपात न्याय प्रणाली की सुरक्षा बनाए रखते हैं

9मेरे पुत्र, तब तुम्हें धर्मी, बिना पक्षपात न्याय,

10क्योंकि तब ज्ञान तुम्हारे हृदय में आ बसेगा,

11निर्णय-ज्ञान तुम्हारी चौकसी करेगा,

12ये तुम्हें बुराई के मार्ग से और ऐसे व्यक्तियों से बचा लेंगे,

13जो अंधकारपूर्ण जीवनशैली को अपनाने के लिए

14जिन्हें कुकृत्यों

15जिनके व्यवहार ही कुटिल हैं

16तब ज्ञान तुम्हें अनाचरणीय स्त्री से, उस अन्य पुरुषगामिनी से,

17जिसने युवावस्था के साथी का परित्याग कर दिया है

18उसका घर-परिवार मृत्यु के गर्त में समाता जा रहा है,

19जो कोई उसके पास गया, वह लौटकर कभी न आ सकता,

20मेरे पुत्र, ज्ञान तुम्हें भलाई के मार्ग पर ले जाएगा

21धर्मियों को ही देश प्राप्‍त होगा,

22किंतु दुर्जनों को देश से निकाला जाएगा

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सूक्ति संग्रह 2 — hindi:

इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी - 2019