1याहवेह से विनती करो कि वह वसन्त ऋतु में वर्षा भेजें;
2मूर्तियां धोखा देनेवाली बात कहते हैं,
3“मेरा क्रोध चरवाहों पर भड़क रहा है,
4यहूदाह से कोने का पत्थर आयेगा,
5एक साथ वे युद्ध में उन योद्धाओं के समान होंगे,
6“मैं यहूदाह के लोगों को मजबूत करूंगा
7तब एफ्राईमी लोग योद्धा के समान हो जाएंगे,
8मैं उन्हें संकेत देकर
9यद्यपि मैंने उन्हें लोगों के बीच में बिखरा दिया है,
10मैं उन्हें मिस्र देश से लौटा लाऊंगा
11वे समस्याओं के समुद्र से होकर गुज़रेंगे;
12मैं उन्हें याहवेह में मजबूत करूंगा