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अय्योब 7

Biblica® हिंदी समकालीन संस्करण-स्वतंत्र उपलब्धि · hindi

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1“क्या ऐहिक जीवन में मनुष्य श्रम करने के लिए बंधा नहीं है?

2उस दास के समान, जो हांफते हुए छाया खोजता है,

3इसी प्रकार मेरे लिए निरर्थकता के माह

4मैं इस विचार के साथ बिछौने पर जाता हूं, ‘मैं कब उठूंगा?’

5मेरी खाल पर कीटों एवं धूल की परत जम चुकी है,

6“मेरे दिनों की गति तो बुनकर की धड़की की गति से भी अधिक है,

7यह स्मरणीय है कि मेरा जीवन मात्र श्वास है;

8वह, जो मुझे आज देख रहा है, इसके बाद नहीं देखेगा;

9जब कोई बादल छुप जाता है, उसका अस्तित्व मिट जाता है,

10वह अपने घर में नहीं लौटता;

11“तब मैं अपने मुख को नियंत्रित न छोड़ूंगा;

12परमेश्वर, क्या मैं सागर हूं, अथवा सागर का विकराल जल जंतु,

13यदि मैं यह विचार करूं कि बिछौने पर तो मुझे सुख संतोष प्राप्‍त हो जाएगा,

14तब आप मुझे स्वप्नों के द्वारा भयभीत करने लगते हैं

15कि मेरी आत्मा को घुटन हो जाए,

16मैं अपने जीवन से घृणा करता हूं; मैं सर्वदा जीवित रहना नहीं चाहता हूं.

17“प्रभु, मनुष्य है ही क्या, जिसे आप ऐसा महत्व देते हैं,

18हर सुबह आप उसका परीक्षण करते,

19क्या आप अपनी दृष्टि मुझ पर से कभी न हटाएंगे?

20प्रभु, आप जो मनुष्यों पर अपनी दृष्टि लगाए रखते हैं, क्या किया है मैंने आपके विरुद्ध?

21तब आप मेरी गलतियों को क्षमा क्यों नहीं कर रहे,

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अय्योब 7 — hindi:

इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी - 2019