1उस दिन दबोरा तथा अबीनोअम के पुत्र बाराक ने यह गीत गाया:
2“धन्य हैं याहवेह!
3“सुन लो, राजाओं; ध्यान दो शासको!
4“याहवेह, जब आप सेईर से बाहर निकले,
5याहवेह के सामने पहाड़ हिल गए. यहां तक कि सीनायी पहाड़ भी,
6“अनात के पुत्र शमगर के दिनों में,
7इस्राएल देश में अब ग्रामीण नहीं बचे थे,
8नए देवता चुने गए,
9मेरा हृदय इस्राएल के सेनापतियों के पक्ष में है,
10“तुम, जो सफ़ेद गधों पर यात्रा करते हो,
11पनघटों के बीच में पानी भरनेवाली स्त्रियों की जो आवाज आ रही है उस पर ध्यान दो,
12‘जागो, दबोरा, जागो!
13“तब वे, जो जीवित रह गए थे, अधिकारियों से मिलने आए.
14एफ्राईम से वे लोग नीचे उतर आए, जिनका मूल अमालेक में है.
15यिस्साकार के शासक दबोरा के साथ थे.
16चरवाहों द्वारा भेड़ों के लिए किए जा रहे बांसुरी के गीत को
17गिलआद यरदन के पार ही ठहरा रहा,
18ज़ेबुलून वंशजों ने अपने प्राणों की चिंता न की;
19“राजा आए, उन्होंने युद्ध किया,
20तारों ने आकाश से युद्ध किया.
21कीशोन की धारा उन्हें बहा ले गई,
22तब घोड़े की टाप सुने गए,
23याहवेह के दूत ने आदेश दिया, ‘मेरोज को शाप दो.
24“स्त्रियों में परम धन्य है याएल.
25सीसरा ने विनती तो जल की थी, किंतु उसने उसे दूध दे दिया;
26उसने एक हाथ में तंबू की खूंटी उठाई
27वह उसके पैरों के बीच झुका,
28“सीसरा की मां खिड़की में से झांकती हुई रो रही थी.
29उसकी चतुर राजपुत्रियां उसे इसका उत्तर देंगी,
30‘क्या, उन्हें अब तक लूट का सामान नहीं मिला?
31“याहवेह, आपके सभी शत्रु इसी प्रकार नष्ट हों!