1याहवेह यों कहते हैं:
2क्योंकि ये सब मेरे ही हाथों से बने,
3जो बैल की बलि करता है
4अतः उनके लिए दंड मैं निर्धारित करके उन्हें वही दंड दूंगा,
5तुम सभी जो याहवेह के वचन को मानते हो सुनो:
6नगर से हलचल तथा मंदिर से
7“प्रसववेदना शुरू होने के पहले ही,
8क्या कभी किसी ने ऐसा सुना है?
9क्या मैं प्रसव बिंदु तक लाकर
10“तुम सभी जिन्हें येरूशलेम से प्रेम है,
11कि तुम उसके सांत्वना देनेवाले स्तनों से
12क्योंकि याहवेह यों कहते हैं:
13तुम्हें मेरे द्वारा उसी तरह तसल्ली दी जाएगी,
14तुम यह सब देखोगे, तथा तुम्हारा मन आनंद से भर जाएगा
15याहवेह आग में प्रकट होंगे,
16क्योंकि आग के द्वारा ही याहवेह का न्याय निष्पक्ष होगा
17याहवेह ने कहा, “वे जो अपने आपको पवित्र और शुद्ध करते हैं ताकि वे उन बागों में जाएं, और जो छुपकर सूअर या चूहे का मांस तथा घृणित वस्तुएं खाते हैं उन सभी का अंत निश्चित है.
18“क्योंकि मैं, उनके काम एवं उनके विचार जानता हूं; और मैं सब देशों तथा भाषा बोलने वालों को इकट्ठा करूंगा, वे सभी आएंगे तथा वे मेरी महिमा देखेंगे.
19“उनके बीच मैं एक चिन्ह प्रकट करूंगा, तथा उनमें से बचे हुओं को अन्यजातियों के पास भेजूंगा. तरशीश, पूत, लूद, मेशेख, तूबल तथा यावन के देशों में, जिन्होंने न तो मेरा नाम सुना है, न ही उन्होंने मेरे प्रताप को देखा है, वहां वे मेरी महिमा को दिखाएंगे.
20तब वे सब देशों में से तुम्हारे भाई-बन्धु याहवेह के लिए अर्पण समान अश्वों, रथों, पालकियों, खच्चरों एवं ऊंटों को लेकर येरूशलेम में मेरे पवित्र पर्वत पर आएंगे. जिस प्रकार इस्राएल वंश याहवेह के भवन में शुद्ध पात्रों में अन्नबलि लेकर आएंगे.” याहवेह की यही वाणी है.
21“तब उनमें से मैं कुछ को पुरोहित तथा कुछ को लेवी होने के लिए अलग करूंगा,” यह याहवेह की घोषणा है.
22“क्योंकि ठीक जिस प्रकार नया आकाश और नई पृथ्वी जो मैं बनाने पर हूं मेरे सम्मुख बनी रहेगी,” याहवेह की यही वाणी है, “उसी प्रकार तुम्हारा वंश और नाम भी बना रहेगा.
23यह ऐसा होगा कि एक नये चांद से दूसरे नये चांद के दिन तक और एक विश्राम दिन से दूसरे विश्राम दिन तक सभी लोग मेरे सामने दंडवत करने आएंगे,” यह याहवेह का वचन है.
24“तब वे बाहर जाएंगे तथा उन व्यक्तियों के शवों को देखेंगे, जिन्होंने मेरे विरुद्ध अत्याचार किया था; क्योंकि उनके कीड़े नहीं मरेंगे और उनकी आग कभी न बुझेगी, वे सभी मनुष्यों के लिए घृणित बन जाएंगे.”