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यशायाह 57

Biblica® हिंदी समकालीन संस्करण-स्वतंत्र उपलब्धि · hindi

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1धर्मी व्यक्ति नाश होते हैं,

2वे शांति पहचानते हैं,

3“परंतु हे जादूगरनी,

4तुम किस पर हंसते हो?

5सब हरे वृक्ष के नीचे कामातुर होते हो और नालों में

6तुम्हारा संबंध तो चट्टान के उन चिकने पत्थरों से है;

7ऊंचे पर्वत पर तुमने अपना बिछौना लगाया है;

8द्वार तथा द्वार के चौखट के पीछे

9राजा से मिलने के लिए तुमने यात्रा की

10तुम तो लंबे मार्ग के कारण थक चुके थे,

11“कौन था वह जिससे तुम डरती थी

12मैं तुम्हारे धर्म एवं कामों को बता दूंगा,

13बुलाने पर,

14तब यह कहा जाएगा:

15क्योंकि जो महान, उत्तम और सदा-सर्वदा जीवित रहते हैं—

16क्योंकि मैं सदा-सर्वदा वाद-विवाद करता न रहूंगा,

17उसके लालच के कारण मैं उससे क्रोधित होकर;

18मैंने उसका चालचलन देखा है, फिर भी अब उसको चंगा करूंगा;

19मैं उनके होंठों के फल का रचनेवाला हूं.

20परंतु दुष्ट लहराते हुए सागर समान है,

21मेरे परमेश्वर का वचन है, “दुष्टों के लिए शांति नहीं.”

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यशायाह 57 — hindi:

इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी - 2019