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यशायाह 48

Biblica® हिंदी समकालीन संस्करण-स्वतंत्र उपलब्धि · hindi

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1“हे याकोब के वंश,

2क्योंकि वे पवित्र होने का दावा करते हैं

3होनेवाली बातों को पहले ही बताया है,

4इसलिये कि मुझे मालूम है कि तुम हठीले हो;

5इस कारण मैंने यह बात पहले ही बता दी थी;

6तुम सुन चुके हो; अब यह देख लो.

7इसकी रचना अभी की गई है पहले से नहीं;

8हां सच तुमने सुना नहीं, तुम्हें इसका ज्ञान तक न था;

9अपने ही नाम के कारण मैंने अपने क्रोध को रोक रखा है;

10यह देख, मैंने तुम्हें शुद्ध तो किया है, परंतु चांदी के समान मैंने तुम्हें दुःख देकर;

11अपने हित में, हां! अपने हित में, मैंने यह किया है.

12“हे याकोब,

13इसमें कोई संदेह नहीं कि मेरे हाथों ने पृथ्वी की नींव रखी,

14“तुम सब मेरी बात ध्यान से सुनो:

15मैंने कह दिया है;

16“मेरे पास आकर यह सुनो,

17तुम्हें छुड़ाने वाला इस्राएल के पवित्र परमेश्वर,

18यदि तुमने मेरी बातों पर मात्र ध्यान दिया होता,

19तुम्हारे वंश बालू के कण के समान होते,

20बाबेल से निकल जाओ,

21जब याहवेह उन्हें मरुस्थल में से लेकर आए थे, वे प्यासे नहीं हुए;

22“दुष्टों को कोई शांति नहीं मिलेगी,” यह याहवेह का वचन है.

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यशायाह 48 — hindi:

इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी - 2019