1घमंड का मुकुट जो एफ्राईम के मतवालों का है,
2देखो, याहवेह के पास एक है जो शक्तिशाली और मजबूत है,
3एफ्राईम मतवालों के अहंकारी मुकुट को,
4इसकी सुंदरता मुरझाया हुआ फूल,
5उस दिन सर्वशक्तिमान याहवेह
6और जो न्याय-सिंहासन पर बैठा होता है
7पुरोहित और भविष्यद्वक्ता भी दाखमधु पीकर डगमगाते हैं,
8क्योंकि भोजन करने की जगह गंदगी से भरी हुई हैं
9“किसको सिखाएं और किसको समझाएं?
10आज्ञा पर आज्ञा, आज्ञा पर आज्ञा,
11परमेश्वर इन लोगों को हकलाते हुए होंठों
12जिन्होंने उन्हें इस प्रकार कहा,
13तब उनके लिए याहवेह ने उनसे कहा:
14इस कारण हे ठट्ठा करनेवालो, याहवेह की बात सुनो,
15क्योंकि तुमने कहा है, “हमने मृत्यु से एक वाचा बांधी है
16इसलिये याहवेह यों कहते हैं:
17मैं न्याय को नाप की डोरी
18मृत्यु से तुम्हारी वाचा टूट जाएगी;
19जितना तुम बढ़ोगे वह तुम्हें दबा देगी;
20किसी को फैलकर सोने के लिए बिछौना छोटा पड़ जाता है,
21क्योंकि याहवेह उसी प्रकार खड़े हो जाएंगे जिस प्रकार वह पराज़ीम पर्वत पर खड़े हुए थे,
22इसलिये अब ठट्ठा करनेवालों के समान मत बनो,
23ध्यान दो और सुनो सचेत हो जाओ;
24क्या बीज बोने वाले के लिए एक किसान भूमि को जोतता रहता है?
25क्या वह इसे समतल नहीं बनाता और इसमें सौंफ उगाता,
26क्योंकि उसे बताये गए हैं,
27सौंफ की दंवरी पटरे से नहीं की जाती,
28क्या दंवरी में रोटी के लिए अन्न को चूर-चूर किया जाता है;
29इसे नियुक्त करनेवाला भी सर्वशक्तिमान याहवेह ही,