1याहवेह, आप ही मेरे परमेश्वर हैं;
2आपने नगरों को गिरा दिया,
3इसलिये बलवंत प्रजा आपकी महिमा करेगी;
4दीनों के लिए आप शरणस्थान,
5जैसे निर्जल देश में बादल से ठंडक होती है;
6इसी पर्वत पर सर्वशक्तिमान याहवेह
7इस पर्वत पर आकर सब जातियों
8वह सदा-सर्वदा के लिए मृत्यु को नाश करेंगे.
9उस दिन लोग यह कहेंगे,
10क्योंकि याहवेह का हाथ सदा बना रहेगा;
11जिस प्रकार एक तैराक अपने हाथों को फैलाता है,
12याहवेह उसकी दृढ़ शहरपनाह को गिरा देंगे