1तब याकोब ने अपने बेटों को बुलाकर उनसे कहा: “तुम सब एक साथ आओ, ताकि तुम्हें बता सकूं कि तुम्हारे साथ अब क्या-क्या होगा.
2“याकोब के पुत्रो,
3“रियूबेन, तुम तो मेरे बड़े बेटे,
4जो अशांत पानी के समान उग्र हैं,
5“शिमओन तथा लेवी भाई-भाई हैं;
6ऐसा कभी न हो कि मुझे उनकी सभा में जाना पड़े,
7शापित है उनका क्रोध जो भीषण हैं और उनका ऐसा गुस्सा,
8“यहूदाह, तुम्हारे भाई तुम्हारी प्रशंसा करेंगे;
9यहूदाह तो जवान सिंह के समान है;
10यहूदाह से राजदंड कभी भी अलग न होगा
11अपने गधे को दाखलता से बांध देता है,
12उसकी आंखें दाखमधु से चमकीली तथा,
13“ज़ेबुलून सागर के किनारे रहेगा
14“इस्साखार एक बलवंत गधा है,
15जब उसने देखा कि आराम करने की जगह ठीक है,
16“दान अपने लोगों का न्याय
17दान मार्ग का एक सांप होगा,
18“हे याहवेह, मैं आपके उद्धार की बाट जोहता हूं.
19“गाद पर छापामार छापा मारेंगे,
20“आशेर का अन्न बहुत उत्तम होगा
21“नफताली छोड़ी हुई हिरणी के समान है जो
22“योसेफ़ तो फल से भरी एक शाखा है
23धनुष चलानेवाले ने धनुष चलाया
24परंतु उसका धनुष दृढ़ रहा,
25तुम्हारे पिता के परमेश्वर की ओर से,
26तुम्हारे पिता की आशीषें तो मेरे पूर्वजों के पहाड़ों से बढ़कर हैं
27“बिन्यामिन एक क्रूर भेड़िया है;
28ये सभी इस्राएल के बारह गोत्र हैं उनके पिता ने उनके बारे में तब कहा जब वह उन्हें आशीष दे रहे थे, और उनमें से एक-एक को इन्हीं वचनों से आशीष दी.
29तब इस्राएल ने कहा, “मुझे मेरे पूर्वजों की उसी गुफ़ा में दफनाना, जो एफ्रोन हित्ती के खेत में है,
30कनान देश में उस कब्रस्थान में, जो माखपेलाह के खेत में, ममरे के पास है, जिसे अब्राहाम ने हित्ती एफ्रोन से खरीदा था.
31वहां उन्होंने अब्राहाम तथा उनकी पत्नी साराह को दफनाया था, वहीं उन्होंने यित्सहाक तथा उनकी पत्नी रेबेकाह को दफनाया तथा वहीं मैंने लियाह को भी दफनाया है;
32वह खेत गुफा सहित हित्तियों से खरीदा है.”
33जब याकोब अपने पुत्रों को ये आदेश दे चुके, तब उन्होंने अपने पैर अपने बिछौने पर कर लिए तथा आखिरी सांस ली, वे अपने पूर्वजों से जा मिले.