1जिस प्रकार मरी हुई मक्खियां सुगंध तेल को बदबूदार बना देती हैं,
2बुद्धिमान का हृदय तो उसे सही ओर ले जाता है,
3रास्ते पर चलते समय भी मूर्खों के हृदय में,
4यदि राजा का क्रोध तुम्हारे विरुद्ध भड़क गया है,
5सूरज के नीचे मैंने एक और बुराई देखी,
6वह यह कि मूर्खता ऊंचे पदों पर बैठी होती है,
7मैंने दासों को तो घोड़ों पर,
8जो गड्ढा खोदता है वह खुद उसमें गिरेगा;
9जो पत्थर खोदता है वह उन्हीं से चोटिल हो जाएगा;
10यदि कुल्हाड़े की धार तेज नहीं है
11और यदि सांप मंत्र पढ़ने से पहले ही डस ले तो,
12बुद्धिमान की बातों में अनुग्रह होता है,
13उसकी बातों की शुरुआत ही मूर्खता से होती है
14जबकि वह अपनी बातें बढ़ाकर भी बोलता है.
15मूर्ख की मेहनत उसे इतना थका देती है;
16धिक्कार है उस देश पर जिसका राजा एक कम उम्र का युवक है
17मगर सुखी है वह देश जिसका राजा कुलीन वंश का है
18आलस से छत की कड़ियों में झोल पड़ जाते हैं;
19लोग मनोरंजन के लिए भोजन करते हैं,
20अपने विचारों में भी राजा को न धिक्कारना,