1जो परमप्रधान के छाए हुए स्थान में बैठा रहे,
2मैं यहोवा के विषय कहूँगा, “वह मेरा शरणस्थान और गढ़ है;
3वह तो तुझे बहेलिये के जाल से,
4वह तुझे अपने पंखों की आड़ में ले लेगा,
5तू न रात के भय से डरेगा,
6न उस मरी से जो अंधेरे में फैलती है,
7तेरे निकट हजार,
8परन्तु तू अपनी आँखों की दृष्टि करेगा91:8 तू अपनी आँखों की दृष्टि करेगा: तू अभक्तों का न्यायोचित दण्ड देखेगा वे जो दुराचारी है, और परमेश्वर निन्दक हैं। तू उनके आचरण का उचित फल देखेगा।
9हे यहोवा, तू मेरा शरणस्थान ठहरा है।
10इसलिए कोई विपत्ति तुझ पर न पड़ेगी,
11क्योंकि वह अपने दूतों को तेरे निमित्त आज्ञा देगा,
12वे तुझको हाथों हाथ उठा लेंगे,
13तू सिंह और नाग को कुचलेगा,
14उसने जो मुझसे स्नेह किया है, इसलिए मैं उसको छुड़ाऊँगा;
15जब वह मुझ को पुकारे, तब मैं उसकी सुनूँगा;
16मैं उसको दीर्घायु से तृप्त करूँगा,