1उसकी नींव पवित्र पर्वतों में है;
2और यहोवा सिय्योन के फाटकों से याकूब के सारे निवासों से बढ़कर प्रीति रखता है।
3हे परमेश्वर के नगर,
4मैं अपने जान-पहचानवालों से रहब और बाबेल की भी चर्चा करूँगा;
5और सिय्योन के विषय में यह कहा जाएगा,
6यहोवा जब देश-देश के लोगों के नाम लिखकर गिन लेगा, तब यह कहेगा,
7गवैये और नृतक दोनों कहेंगे,