1परमेश्वर यहूदा में जाना गया है,
2और उसका मण्डप शालेम में,
3वहाँ उसने तीरों को,
4हे परमेश्वर, तू तो ज्योतिर्मय है:
5दृढ़ मनवाले लुट गए, और भारी नींद में पड़े हैं;
6हे याकूब के परमेश्वर, तेरी घुड़की से,
7केवल तू ही भययोग्य है;
8तूने स्वर्ग से निर्णय सुनाया है;
9जब परमेश्वर न्याय करने को,
10निश्चय मनुष्य की जलजलाहट तेरी स्तुति का कारण हो जाएगी,
11अपने परमेश्वर यहोवा की मन्नत मानो, और पूरी भी करो;
12वह तो प्रधानों का अभिमान मिटा देगा;