1हे परमेश्वर, जब मैं तेरी दुहाई दूँ, तब मेरी सुन;
2कुकर्मियों की गोष्ठी से,
3उन्होंने अपनी जीभ को तलवार के समान तेज किया है,
4ताकि छिपकर खरे मनुष्य को मारें;
5वे बुरे काम करने को हियाव बाँधते हैं;
6वे कुटिलता की युक्ति निकालते हैं;
7परन्तु परमेश्वर उन पर तीर चलाएगा64:7 परन्तु परमेश्वर उन पर तीर चलाएगा: मनुष्यों पर तीर चलाने का उनका उद्देश्य है परन्तु इससे पहले कि वे सक्षम हों परमेश्वर उन पर अपने तीर चलाएगा। ;
8वे अपने ही वचनों के कारण ठोकर खाकर गिर पड़ेंगे;
9तब सारे लोग डर जाएँगे64:9 तब सारे लोग डर जाएँगे: दुष्ट को जब न्याय समेत दण्ड मिलेगा तब सब मनुष्य परमेश्वर का आदर करना सीख लेंगे और ऐसे सामर्थी परमेश्वर का भय मानेंगे। ;
10धर्मी तो यहोवा के कारण आनन्दित होकर उसका शरणागत होगा,