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भजन संहिता 49

इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी - 2019 · hindi

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1हे देश-देश के सब लोगों यह सुनो!

2क्या ऊँच, क्या नीच

3मेरे मुँह से बुद्धि की बातें निकलेंगी;

4मैं नीतिवचन की ओर अपना कान लगाऊँगा,

5विपत्ति के दिनों में मैं क्यों डरूँ जब अधर्म मुझे आ घेरे?

6जो अपनी सम्पत्ति पर भरोसा रखते,

7उनमें से कोई अपने भाई को किसी भाँति

8क्योंकि उनके प्राण की छुड़ौती भारी है

9कोई ऐसा नहीं जो सदैव जीवित रहे,

10क्योंकि देखने में आता है कि बुद्धिमान भी मरते हैं,

11वे मन ही मन यह सोचते हैं, कि उनका घर

12परन्तु मनुष्य प्रतिष्ठा पाकर भी स्थिर नहीं रहता,

13उनकी यह चाल उनकी मूर्खता है,

14वे अधोलोक की मानो भेड़ों का झुण्ड ठहराए गए हैं;

15परन्तु परमेश्वर मेरे प्राण को अधोलोक के

16जब कोई धनी हो जाए और उसके घर का

17क्योंकि वह मरकर कुछ भी साथ न ले जाएगा;

18चाहे वह जीते जी अपने आपको धन्य कहता रहे।

19तो भी वह अपने पुरखाओं के समाज में मिलाया जाएगा,

20मनुष्य चाहे प्रतिष्ठित भी हों परन्तु यदि वे

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भजन संहिता 49 — hindi:

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