1हे यहोवा तेरी सामर्थ्य से राजा आनन्दित होगा;
2तूने उसके मनोरथ को पूरा किया है,
3क्योंकि तू उत्तम आशीषें देता हुआ उससे मिलता है
4उसने तुझ से जीवन माँगा, और तूने जीवनदान दिया;
5तेरे उद्धार के कारण उसकी महिमा अधिक है;
6क्योंकि तूने उसको सर्वदा के लिये आशीषित किया है21:6 तूने उसको सर्वदा के लिये आशीषित किया है: विचार यह है कि उसने उसे मनुष्यों के लिए या संसार के लिए आशीष का कारण बनाया था। उसे मनुष्यों के लिए आशीष का स्रोत बनाया है। ;
7क्योंकि राजा का भरोसा यहोवा के ऊपर है;
8तेरा हाथ तेरे सब शत्रुओं को ढूँढ़ निकालेगा,
9तू अपने मुख के सम्मुख उन्हें जलते हुए भट्ठे
10तू उनके फलों को पृथ्वी पर से,
11क्योंकि उन्होंने तेरी हानि ठानी है,
12क्योंकि तू अपना धनुष उनके विरुद्ध चढ़ाएगा,
13हे यहोवा, अपनी सामर्थ्य में महान हो;