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भजन संहिता 144

इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी - 2019 · hindi

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1धन्य है यहोवा, जो मेरी चट्टान है,

2वह मेरे लिये करुणानिधान और गढ़,

3हे यहोवा, मनुष्य क्या है कि तू उसकी सुधि लेता है,

4मनुष्य तो साँस के समान है;

5हे यहोवा, अपने स्वर्ग को नीचा करके उतर आ!

6बिजली कड़काकर उनको तितर-बितर कर दे,

7अपना हाथ ऊपर से बढ़ाकर मुझे महासागर से उबार,

8उनके मुँह से तो झूठी बातें निकलती हैं,

9हे परमेश्वर, मैं तेरी स्तुति का नया गीत गाऊँगा;

10तू राजाओं का उद्धार करता है,

11मुझ को उबार और परदेशियों के वश से छुड़ा ले,

12हमारे बेटे जवानी के समय पौधों के समान बढ़े हुए हों144:12 हमारे बेटे जवानी के समय पौधों के समान बढ़े हुए हों: अर्थात् आरम्भिक जीवन ही में वे स्वस्थ, बलवन्त, जीवन्त, गठे हुए रहे हों।,

13हमारे खत्ते भरे रहें, और उनमें भाँति-भाँति का अन्न रखा जाए,

14तब हमारे बैल खूब लदे हुए हों;

15तो इस दशा में जो राज्य हो वह क्या ही धन्य होगा!

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भजन संहिता 144 — hindi:

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