1हे यहोवा, मेरी प्रार्थना सुन;
2मेरे संकट के दिन अपना मुख मुझसे न छिपा ले;
3क्योंकि मेरे दिन धुएँ के समान उड़े जाते हैं,
4मेरा मन झुलसी हुई घास के समान सूख गया है;
5कराहते-कराहते मेरी चमड़ी हड्डियों में सट गई है।
6मैं जंगल के धनेश के समान हो गया हूँ,
7मैं पड़ा-पड़ा जागता रहता हूँ और गौरे के समान हो गया हूँ
8मेरे शत्रु लगातार मेरी नामधराई करते हैं,
9क्योंकि मैंने रोटी के समान राख खाई और आँसू मिलाकर पानी पीता हूँ।
10यह तेरे क्रोध और कोप के कारण हुआ है,
11मेरी आयु ढलती हुई छाया के समान है;
12परन्तु हे यहोवा, तू सदैव विराजमान रहेगा;
13तू उठकर सिय्योन पर दया करेगा;
14क्योंकि तेरे दास उसके पत्थरों को चाहते हैं,
15इसलिए जाति-जाति यहोवा के नाम का भय मानेंगी,
16क्योंकि यहोवा ने सिय्योन को फिर बसाया है,
17वह लाचार की प्रार्थना की ओर मुँह करता है,
18यह बात आनेवाली पीढ़ी के लिये लिखी जाएगी,
19क्योंकि यहोवा ने अपने ऊँचे और पवित्रस्थान से दृष्टि की;
20ताकि बन्दियों का कराहना सुने,
21तब लोग सिय्योन में यहोवा के नाम का वर्णन करेंगे,
22यह उस समय होगा जब देश-देश,
23उसने मुझे जीवन यात्रा में दुःख देकर,
24मैंने कहा, “हे मेरे परमेश्वर, मुझे आधी आयु में न उठा ले,
25आदि में तूने पृथ्वी की नींव डाली,
26वह तो नाश होगा, परन्तु तू बना रहेगा;
27परन्तु तू वहीं है,
28तेरे दासों की सन्तान बनी रहेगी;