We Believe JesusFé, Esperança e Nova Vida

नीतिवचन 29

इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी - 2019 · hindi

← नीतिवचन 28 नीतिवचन नीतिवचन 30 →

1जो बार बार डाँटे जाने पर भी हठ करता है, वह अचानक नष्ट हो जाएगा29:1 अचानक नष्ट हो जाएगा: दीर्घ काल से विलम्बित दण्ड की आकस्मिकता पर बल दिया गया है।

2जब धर्मी लोग शिरोमणि होते हैं, तब प्रजा आनन्दित होती है;

3जो बुद्धि से प्रीति रखता है, वह अपने पिता को आनन्दित करता है,

4राजा न्याय से देश को स्थिर करता है,

5जो पुरुष किसी से चिकनी चुपड़ी बातें करता है,

6बुरे मनुष्य का अपराध उसके लिए फंदा होता है,

7धर्मी पुरुष कंगालों के मुकद्दमे में मन लगाता है;

8ठट्ठा करनेवाले लोग नगर को फूँक देते हैं,

9जब बुद्धिमान मूर्ख के साथ वाद-विवाद करता है,

10हत्यारे लोग खरे पुरुष से बैर रखते हैं,

11मूर्ख अपने सारे मन की बात खोल देता है,

12जब हाकिम झूठी बात की ओर कान लगाता है,

13निर्धन और अंधेर करनेवाले व्यक्तियों में एक समानता है;

14जो राजा कंगालों का न्याय सच्चाई से चुकाता है,

15छड़ी और डाँट से बुद्धि प्राप्त होती है,

16दुष्टों के बढ़ने से अपराध भी बढ़ता है;

17अपने बेटे की ताड़ना कर, तब उससे तुझे चैन मिलेगा;

18जहाँ दर्शन की बात नहीं होती, वहाँ लोग निरंकुश हो जाते हैं,

19दास बातों ही के द्वारा सुधारा नहीं जाता,

20क्या तू बातें करने में उतावली करनेवाले मनुष्य को देखता है?

21जो अपने दास को उसके लड़कपन से ही लाड़-प्यार से पालता है,

22क्रोध करनेवाला मनुष्य झगड़ा मचाता है

23मनुष्य को गर्व के कारण नीचा देखना पड़ता है,

24जो चोर की संगति करता है वह अपने प्राण का बैरी होता है;

25मनुष्य का भय खाना फंदा हो जाता है,

26हाकिम से भेंट करना बहुत लोग चाहते हैं,

27धर्मी लोग कुटिल मनुष्य से घृणा करते हैं

← नीतिवचन 28 नीतिवचन नीतिवचन 30 →

नीतिवचन 29 — hindi:

Biblica® हिंदी समकालीन संस्करण-स्वतंत्र उपलब्धि