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अय्यूब 4

इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी - 2019 · hindi

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1तब तेमानी एलीपज ने कहा,

2“यदि कोई तुझ से कुछ कहने लगे,

3सुन, तूने बहुतों को शिक्षा दी है,

4गिरते हुओं को तूने अपनी बातों से सम्भाल लिया,

5परन्तु अब विपत्ति तो तुझी पर आ पड़ी,

6क्या परमेश्वर का भय ही तेरा आसरा नहीं?

7“क्या तुझे मालूम है कि कोई निर्दोष भी

8मेरे देखने में तो जो पाप को जोतते और

9वे तो परमेश्वर की श्वास से नाश होते,

10सिंह का गरजना और हिंसक सिंह का दहाड़ना बन्द हो जाता है।

11शिकार न पाकर बूढ़ा सिंह मर जाता है,

12“एक बात चुपके से मेरे पास पहुँचाई गई,

13रात के स्वप्नों की चिन्ताओं के बीच जब

14मुझे ऐसी थरथराहट और कँपकँपी लगी कि

15तब एक आत्मा मेरे सामने से होकर चली;

16वह चुपचाप ठहर गई और मैं उसकी आकृति को पहचान न सका।

17‘क्या नाशवान मनुष्य परमेश्वर से अधिक धर्मी होगा?

18देख, वह अपने सेवकों पर भरोसा नहीं रखता,

19फिर जो मिट्टी के घरों में रहते हैं,

20वे भोर से साँझ तक नाश किए जाते हैं4:20 वे भोर से साँझ तक नाश किए जाते हैं: कहने का अर्थ यह नहीं कि सुबह से शाम तक विनाश का कार्य चलता है अपितु यह कि मनुष्य का जीवन बहुत ही छोटा है, इतना छोटा है कि वह सुबह से रात तक जीवित रहता है। ,

21क्या उनके डेरे की डोरी उनके अन्दर ही

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अय्यूब 4 — hindi:

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