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अय्यूब 15

इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी - 2019 · hindi

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1तब तेमानी एलीपज ने कहा

2“क्या बुद्धिमान को उचित है कि अज्ञानता के साथ उत्तर दे,

3क्या वह निष्फल वचनों से,

4वरन् तू परमेश्वर का भय मानना छोड़ देता,

5तू अपने मुँह से अपना अधर्म प्रगट करता है,

6मैं तो नहीं परन्तु तेरा मुँह ही तुझे दोषी ठहराता है;

7“क्या पहला मनुष्य तू ही उत्पन्न हुआ?

8क्या तू परमेश्वर की सभा में बैठा सुनता था?

9तू ऐसा क्या जानता है जिसे हम नहीं जानते?

10हम लोगों में तो पक्के बाल वाले और अति पुरनिये मनुष्य हैं,

11परमेश्वर की शान्तिदायक बातें,

12तेरा मन क्यों तुझे खींच ले जाता है?

13तू भी अपनी आत्मा परमेश्वर के विरुद्ध करता है,

14मनुष्य है क्या कि वह निष्कलंक हो?

15देख, वह अपने पवित्रों पर भी विश्वास नहीं करता,

16फिर मनुष्य अधिक घिनौना और भ्रष्ट है जो

17“मैं तुझे समझा दूँगा, इसलिए मेरी सुन ले,

18(वे ही बातें जो बुद्धिमानों ने अपने पुरखाओं से सुनकर

19केवल उन्हीं को देश दिया गया था,

20दुष्ट जन जीवन भर पीड़ा से तड़पता है, और

21उसके कान में डरावना शब्द गूँजता रहता है,

22उसे अंधियारे में से फिर निकलने की कुछ आशा नहीं होती,

23वह रोटी के लिये मारा-मारा फिरता है, कि कहाँ मिलेगी?

24संकट और दुर्घटना से उसको डर लगता रहता है,

25क्योंकि उसने तो परमेश्वर के विरुद्ध हाथ बढ़ाया है,

26और सिर उठाकर और अपनी मोटी-मोटी

27इसलिए कि उसके मुँह पर चिकनाई छा गई है,

28और वह उजाड़े हुए नगरों में बस गया है,

29वह धनी न रहेगा, और न उसकी सम्पत्ति बनी रहेगी,

30वह अंधियारे से कभी न निकलेगा,

31वह अपने को धोखा देकर व्यर्थ बातों का भरोसा न करे,

32वह उसके नियत दिन से पहले पूरा हो जाएगा;

33दाख के समान उसके कच्चे फल झड़ जाएँगे,

34क्योंकि भक्तिहीन के परिवार से कुछ बन न पड़ेगा,

35उनको उपद्रव का गर्भ रहता, और वे अनर्थ को जन्म देते है15:35 उनको उपद्रव का गर्भ रहता, और वे अनर्थ को जन्म देते है: इस पद का अर्थ है कि वे बुराई की योजना रचते हैं और उसे कार्यान्वित करते हैं।

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अय्यूब 15 — hindi:

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