1इसके बाद मैंने एक स्वर्गदूत को स्वर्ग से उतरते देखा, जिसको बड़ा अधिकार प्राप्त था; और पृथ्वी उसके तेज से प्रकाशित हो उठी।
2उसने ऊँचे शब्द से पुकारकर कहा,
3क्योंकि उसके व्यभिचार के भयानक मदिरा के कारण सब जातियाँ गिर गई हैं,
4फिर मैंने स्वर्ग से एक और शब्द सुना,
5क्योंकि उसके पापों का ढेर स्वर्ग तक पहुँच गया है,
6जैसा उसने तुम्हें दिया है, वैसा ही उसको दो,
7जितनी उसने अपनी बड़ाई की और सुख-विलास किया;
8इस कारण एक ही दिन में उस पर विपत्तियाँ आ पड़ेंगी,
9“और पृथ्वी के राजा जिन्होंने उसके साथ व्यभिचार, और सुख-विलास किया, जब उसके जलने का धुआँ देखेंगे, तो उसके लिये रोएँगे, और छाती पीटेंगे। (यिर्म. 50:46)
10और उसकी पीड़ा के डर के मारे वे बड़ी दूर खड़े होकर कहेंगे,
11“और पृथ्वी के व्यापारी उसके लिये रोएँगे और विलाप करेंगे, क्योंकि अब कोई उनका माल मोल न लेगा
12अर्थात् सोना, चाँदी, रत्न, मोती, मलमल, बैंगनी, रेशमी, लाल रंग के कपड़े, हर प्रकार का सुगन्धित काठ, हाथी दाँत की हर प्रकार की वस्तुएँ, बहुमूल्य काठ, पीतल, लोहे और संगमरमर की सब भाँति के पात्र,
13और दालचीनी, मसाले, धूप, गन्धरस, लोबान, मदिरा, तेल, मैदा, गेहूँ, गाय-बैल, भेड़-बकरियाँ, घोड़े, रथ, और दास, और मनुष्यों के प्राण।
14अब तेरे मनभावने फल तेरे पास से जाते रहे; और सुख-विलास और वैभव की वस्तुएँ तुझ से दूर हुई हैं, और वे फिर कदापि न मिलेंगी।
15इन वस्तुओं के व्यापारी जो उसके द्वारा धनवान हो गए थे, उसकी पीड़ा के डर के मारे दूर खड़े होंगे, और रोते और विलाप करते हुए कहेंगे,
16‘हाय! हाय! यह बड़ा नगर जो मलमल, बैंगनी, लाल रंग के कपड़े पहने था,
17घड़ी ही भर में उसका ऐसा भारी धन नाश हो गया।’
18और उसके जलने का धुआँ देखते हुए पुकारकर कहेंगे, ‘कौन सा नगर इस बड़े नगर के समान है?’ (यिर्म. 51:37)
19और अपने-अपने सिरों पर धूल डालेंगे18:19 अपने-अपने सिरों पर धूल डालेंगे: शोक और विलाप की एक सामान्य अभिव्यक्ति।, और रोते हुए और विलाप करते हुए चिल्ला चिल्लाकर कहेंगे,
20हे स्वर्ग, और हे पवित्र लोगों,
21फिर एक बलवन्त स्वर्गदूत ने बड़ी चक्की के पाट के समान एक पत्थर उठाया, और यह कहकर समुद्र में फेंक दिया,
22वीणा बजानेवालों, गायकों, बंसी बजानेवालों, और तुरही फूँकनेवालों का शब्द फिर कभी तुझ में सुनाई न देगा,
23और दीया का उजाला फिर कभी तुझ में न चमकेगा
24और भविष्यद्वक्ताओं और पवित्र लोगों,